‘The Devil’ Review: सिनेमा हमें कभी रोमांचित करता है, कभी सोचने पर मजबूर, और कभी सिर्फ मनोरंजन देता है। कन्नड़ स्टार Darshan की नई फिल्म ‘The Devil’ भी ऐसा ही एक अनुभव देती है — जिसमें पावर, पॉलिटिक्स, प्यार और बदले की कहानी मिलकर एक मसालेदार ड्रामा बनाती है। लेकिन क्या फिल्म उतनी ही दमदार निकली, जितनी उम्मीद थी? आइए जानते हैं।
कहानी का आधार — पावर, राजनीति और दो किरदारों की टक्कर
निर्देशक-लेखक प्रकाश वीर की यह फिल्म शुरुआत में एक संतुलित और दिलचस्प दुनिया बनाती है। राजनीति की पृष्ठभूमि, दोहरी भूमिका और अच्छाई बनाम बुराई की क्लासिक थीम — ये तीनों पहलू काफी बार देखे जा चुके हैं, लेकिन फिल्म का पहला हाफ इन्हें हल्के-फुल्के अंदाज में पेश कर दर्शक को बांधे रखता है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब मुख्यमंत्री रजशेखर (महेश मांजरेकर) पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं। उनका बेटा, जो मौका पाने लायक नहीं है, की जगह एक हमशक्ल को सामने लाया जाता है। यह प्लान रचा है नांबियार (अच्युत कुमार) ने, जिसके अपने स्वार्थ छुपे हैं।
Darshan की दोहरी भूमिका — मासूमियत बनाम शैतानी अंदाज़
Darshan फिल्म में दो अवतार में नजर आते हैं —
- कृष्णा, एक सरल, मासूम और संघर्षरत कलाकार
- धनुष, जिसे खुद ‘The Devil’ कहा जाता है और जो सत्ता से ज्यादा पैसों की ताकत में विश्वास करता है
कृष्णा का किरदार बेहद दिल जीतने वाला है। एक छोटे से मेस का मालिक, वह अपनी दयालुता हर काम में दिखाता है। वहीं धनुष के रूप में Darshan स्टाइल और एटीट्यूड तो दिखाते हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उन्हें और गहराई दे पाती तो प्रभाव ज्यादा होता।
पहला हाफ चमकता है, दूसरा हाफ फिसलता है
फिल्म का पहला हिस्सा तेज, मज़ेदार और खुद पर हँसने वाला है। कई जगह स्क्रिप्ट खुद अपनी कमियों को चुटीले अंदाज में स्वीकार करती है। उदाहरण के तौर पर, पिता अपने बेटे को क्यों नहीं पहचान पाता — इसका मज़ेदार जवाब फिल्म खुद देती है।
एक यादगार सीन वह है जब कृष्णा राजनीतिक नेता का रोल निभाते हुए स्कूल के बच्चों के लिए खाना बनाता है। उसके भीतर छिपी अच्छाई दिखती है, लेकिन सबको यह तरीका ‘पब्लिसिटी स्टंट’ लगता है — यह दृश्य फिल्म की समझदार लेखन का बेहतरीन उदाहरण है।
लेकिन इंटरवल के बाद कहानी का उत्साह कम होने लगता है।
लंबी फाइट सीक्वेंस, धीमी गति और दो किरदारों के बीच असली टकराव की कमी फिल्म को थोड़ा भारी बनाते हैं।
रोमांस ट्रैक और गिरती पकड़
फिल्म में दोनों किरदारों का एक ही लड़की (रचना रॉय के साथ) प्यार में पड़ना एक दिलचस्प मोड़ हो सकता था। अगर कहानी ने खलनायक के किरदार को बदले, सोच-विचार और इंसानियत दिखाने का मौका दिया होता, यह हिस्सा और प्रभावी बन सकता था।
दुर्भाग्य से, यहां कहानी में पुरानी त्रुटियाँ आ जाती हैं — जब महिला किरदार केवल परेशान होने के लिए कहानी में मौजूद दिखता है।
Darshan की स्टार पावर — एक मिश्रित परिणाम
‘The Devil’ Darshan की स्टारडम को भरपूर इस्तेमाल करती है।
- वह कृष्णा के रूप में दिल छूते हैं
- लेकिन धनुष के रूप में उन्हें जितनी गुंजाइश मिलनी चाहिए थी, उतनी नहीं मिलती
फिर भी, भावनात्मक दृश्यों में उनका नियंत्रण और मासूमियत, दर्शकों को उनसे जोड़कर रखती है।
फैंस के लिए पूरी दावत, बाकी दर्शकों के लिए मिश्रित अनुभव
फिल्म में Darshan के जीवन और करियर से जुड़े कई मेटा रेफरेंस हैं। यह फिल्म दर्शाती है कि उनकी स्टार पावर कितनी बड़ी है, और स्क्रिप्ट कैसी होनी चाहिए ताकि वह पूरी तरह चमक सके।
‘The Devil’ भरपूर मसाला, बड़े ट्विस्ट, और दमदार एक्शन चाहने वालों को पसंद आ सकती है। लेकिन जो दर्शक गहराई, मजबूत लेखन और संतुलित कहानी की तलाश में हैं, उनके लिए फिल्म थोड़ी लंबी और असंतुलित महसूस हो सकती है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखा गया है। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन और जानकारी प्रदान करना है। फिल्म के प्रति राय व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार भिन्न हो सकती है।
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