माइकल ट्रुएल की चेतावनी: क्यों Vibe Coding बना रहा है कमजोर सॉफ्टवेयर नींव

By: khushal Ingle

On: Saturday, December 27, 2025 3:00 PM

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आज की दुनिया में कोड लिखना पहले से कहीं ज्यादा आसान लगने लगा है। AI टूल्स, ऑटो कंप्लीशन और रेडीमेड फ्रेमवर्क्स ने डेवलपर्स को तेज बना दिया है। लेकिन इसी तेजी के बीच एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो रहा है। क्या हम मजबूत सॉफ्टवेयर बना रहे हैं या सिर्फ काम चलाने वाला कोड लिख रहे हैं। Cursor के CEO माइकल ट्रुएल ने हाल ही में इसी खतरे को लेकर खुली चेतावनी दी है। उनका कहना है कि vibe coding यानी सिर्फ फीलिंग और तात्कालिक समाधान पर आधारित कोडिंग आखिरकार कमजोर नींव तैयार करती है और एक समय पर चीजें बिखरने लगती हैं।

यह चेतावनी सिर्फ स्टार्टअप्स के लिए नहीं, बल्कि हर उस डेवलपर और कंपनी के लिए है जो भविष्य के लिए टेक बना रही है।

Cursor CEO माइकल ट्रुएल की चेतावनी क्या कहती है

Cursor एक पॉपुलर AI आधारित कोड एडिटर है, जिसे आज हजारों डेवलपर्स इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके CEO माइकल ट्रुएल का मानना है कि आज के समय में vibe coding तेजी से बढ़ रहा है। इसमें डेवलपर सिस्टम की गहराई समझे बिना, सिर्फ यह देखकर कोड लिखता है कि आउटपुट मिल रहा है या नहीं।

माइकल ट्रुएल के मुताबिक शुरुआत में ऐसा कोड काम करता है। प्रोडक्ट लॉन्च हो जाता है, यूजर्स भी आ जाते हैं, लेकिन जैसे ही स्केल बढ़ता है, बग्स, सिक्योरिटी इश्यू और परफॉर्मेंस की समस्याएं सामने आने लगती हैं। यही वो पल होता है जब shaky foundations साफ दिखने लगती हैं।

Vibe Coding आखिर है क्या

vibe coding का मतलब है ऐसा कोड लिखना जो लॉजिक, स्ट्रक्चर और लॉन्ग टर्म सोच पर नहीं, बल्कि तात्कालिक फील और रिजल्ट पर आधारित हो। इसमें AI सुझाव देता है, डेवलपर उसे बिना पूरी तरह समझे स्वीकार कर लेता है।

यह तरीका नए डेवलपर्स को तेज लग सकता है, लेकिन माइकल ट्रुएल मानते हैं कि इससे कोड की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। जब डेवलपर खुद यह नहीं जानता कि कोड क्यों काम कर रहा है, तो वह यह भी नहीं समझ पाता कि वह कब और क्यों फेल होगा।

असली दुनिया में इसका असर कैसे दिखता है

इसका असर सिर्फ कोड फाइल तक सीमित नहीं रहता। यूजर्स को इसका नुकसान सीधे महसूस होता है। मोबाइल ऐप्स अचानक क्रैश होने लगते हैं, अपडेट के बाद फीचर्स टूट जाते हैं और डेटा सेफ्टी पर सवाल उठते हैं।

अगर Android ऐप्स का उदाहरण लें, तो Google खुद डेवलपर्स को स्ट्रिक्ट गाइडलाइंस देता है कि हर अपडेट स्टेबल और टेस्टेड होना चाहिए। वजह साफ है। कमजोर कोड सीधे यूजर ट्रस्ट तोड़ देता है। माइकल ट्रुएल की चेतावनी इसी अनुभव से जुड़ी हुई है।

AI टूल्स गलत नहीं हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल कैसे हो रहा है

माइकल ट्रुएल यह नहीं कहते कि AI कोडिंग टूल्स खराब हैं। Cursor खुद AI पर आधारित है। उनका फोकस इस बात पर है कि AI को सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जाए, न कि सोचने की जगह पर।

एक अनुभवी डेवलपर AI सुझाव को समझता है, जांचता है और फिर लागू करता है। vibe coding में यह स्टेप गायब हो जाता है। यही वजह है कि कोड दिखने में सही लगता है, लेकिन अंदर से खोखला होता है।

एक्सपीरियंस क्या सिखाता है

जो डेवलपर्स लंबे समय से इंडस्ट्री में हैं, वे जानते हैं कि सबसे खतरनाक बग वही होते हैं जो शुरुआत में नजर नहीं आते। माइकल ट्रुएल का अनुभव बताता है कि टेक प्रोडक्ट की असली परीक्षा उसके दूसरे या तीसरे साल में होती है, जब यूजर्स बढ़ते हैं और सिस्टम पर लोड आता है।

उस समय वही प्रोडक्ट टिकता है जिसकी नींव मजबूत होती है। बाकी धीरे धीरे टूटने लगते हैं, चाहे उनकी शुरुआत कितनी भी शानदार क्यों न रही हो।

कंपनियों और डेवलपर्स के लिए सीख

माइकल ट्रुएल की चेतावनी एक सलाह की तरह है। वह कहते हैं कि कोडिंग में संतुलन जरूरी है। स्पीड जरूरी है, लेकिन समझ उससे ज्यादा जरूरी है।

Google जैसी बड़ी कंपनियां भी हर अपडेट से पहले कोड रिव्यू, टेस्टिंग और डॉक्यूमेंटेशन पर जोर देती हैं। यही प्रोसेस सॉफ्टवेयर को भरोसेमंद बनाता है। vibe coding इस प्रोसेस को शॉर्टकट में बदल देता है, जो लंबे समय में नुकसान करता है।

क्या भविष्य में vibe coding और बढ़ेगा

AI टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ vibe coding का चलन कम होने के बजाय बढ़ सकता है। लेकिन माइकल ट्रुएल जैसे लीडर्स की आवाज इस दिशा में एक जरूरी ब्रेक है।

यह याद दिलाता है कि टेक सिर्फ जल्दी बनाने का खेल नहीं है। यह भरोसा, स्थिरता और जिम्मेदारी का भी मामला है। डेवलपर्स को यह तय करना होगा कि वे सिर्फ काम करने वाला कोड चाहते हैं या टिकाऊ सिस्टम।

Cursor CEO माइकल ट्रुएल की चेतावनी समय पर आई है। vibe coding आसान रास्ता लगता है, लेकिन यह रास्ता अक्सर कमजोर नींव पर ले जाता है। आज के दौर में जब AI हर जगह है, सबसे बड़ी जिम्मेदारी इंसानी समझ और अनुभव की है।

जो डेवलपर और कंपनियां इस संतुलन को समझ लेंगी, वही लंबे समय तक टिकेंगी। बाकी के लिए टूटना सिर्फ समय की बात होगी।

Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों और टेक इंडस्ट्री से जुड़े बयानों पर आधारित है। इसमें व्यक्त किए गए विचार संबंधित व्यक्तियों और संदर्भों पर आधारित हैं। किसी भी तकनीकी निर्णय से पहले अपने स्तर पर रिसर्च और विशेषज्ञ सलाह लेना जरूरी है।

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khushal Ingle

मैं Khushal Ingle, Dhanchakra.in में ऑटो, टेक, की ट्रेंडिंग और ताज़ा खबरें और जानकारी पेश करता हूँ। नई तकनीक और गेमिंग के प्रति मेरा जुनून हमेशा बना रहता है।
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