कुछ फिल्में सिर्फ स्क्रीन पर नहीं चलतीं, वो सीधे दिल तक पहुंच जाती हैं। Ikkis ऐसी ही एक फिल्म बनकर सामने आई है। फिल्म का पहला रिव्यू सामने आते ही सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब दिखने लगा है। खास बात यह है कि इस फिल्म को देखकर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा खुद अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने बस इतना कहा, “आपकी कमी खलेगी”, और यही शब्द इस फिल्म की गहराई को बयान करने के लिए काफी हैं।
ikkis को लेकर जो शुरुआती प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, वो इसे सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक यादगार अनुभव साबित करती हैं।
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होने का भावनात्मक वजन
इस फिल्म की सबसे बड़ी भावनात्मक परत है धर्मेंद्र की आखिरी ऑन-स्क्रीन मौजूदगी। दशकों तक हिंदी सिनेमा को अपनी पहचान देने वाले धर्मेंद्र को इस फिल्म में देखना दर्शकों के लिए किसी विदाई से कम नहीं है। फिल्म में उनका किरदार छोटा होते हुए भी असर छोड़ता है।
धर्मेंद्र की स्क्रीन प्रेजेंस, उनकी आंखों की भाषा और शांत अभिनय यह महसूस कराता है कि उम्र अभिनय की ताकत को कम नहीं करती। यही वजह है कि ikkis का हर सीन जिसमें धर्मेंद्र हैं, अपने आप में खास बन जाता है।
मुकेश छाबड़ा क्यों हो गए भावुक
फिल्म देखने के बाद मुकेश छाबड़ा की प्रतिक्रिया तेजी से वायरल हो गई। उन्होंने न सिर्फ धर्मेंद्र के लिए भावनात्मक शब्द कहे बल्कि फिल्म की आत्मा की भी तारीफ की। उनके मुताबिक, ikkis एक ऐसी कहानी है जो बिना शोर मचाए बहुत कुछ कह जाती है।
मुकेश छाबड़ा जैसे इंडस्ट्री के अनुभवी व्यक्ति का भावुक होना इस बात का संकेत है कि फिल्म में कुछ तो खास है, जो प्रोफेशनल्स को भी छू गया।
अमिताभ बच्चन के नाती ने किया सरप्राइज

फिल्म की एक और बड़ी चर्चा है अमिताभ बच्चन के नाती का अभिनय। पहली ही फिल्म में उन्होंने यह साबित कर दिया कि वो सिर्फ नाम के सहारे नहीं आए हैं। उनका अभिनय सहज है, बनावटी नहीं और कहानी के साथ पूरी तरह जुड़ा हुआ है।
कई सीन में उनका एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज यह दिखाता है कि उन्होंने अपने किरदार पर मेहनत की है। यही वजह है कि ikkis के पहले रिव्यू में उनका नाम खास तौर पर लिया जा रहा है।
कहानी और निर्देशन का संतुलन
ikkis की कहानी भावनाओं पर आधारित है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक नहीं बनाया गया। निर्देशन में सादगी है, जो कहानी को और मजबूत बनाती है। फिल्म रिश्तों, यादों और समय के साथ बदलते इंसान की बात करती है।
बैकग्राउंड म्यूजिक जरूरत के हिसाब से आता है और दर्शक को सीन से बाहर नहीं खींचता। सिनेमैटोग्राफी भी कहानी के मूड के साथ चलती है।
क्यों खास बनती है Ikkis
- धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होने का ऐतिहासिक महत्व
- भावनात्मक लेकिन सच्ची कहानी
- नए चेहरे का प्रभावशाली अभिनय
- बिना शोर मचाए असर छोड़ने वाला निर्देशन
यही कारण है कि ikkis को सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक भावनात्मक अनुभव कहा जा रहा है।
दर्शकों के लिए क्या है खास
अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो दिल को छू जाएं और थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी याद रहें, तो ikkis आपके लिए है। यह फिल्म आपको हंसाने या रुलाने के लिए मजबूर नहीं करती, बल्कि खुद-ब-खुद भावनाओं में ले जाती है।
Disclaimer: यह लेख फिल्म के शुरुआती रिव्यू, सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। फिल्म से जुड़ी राय व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार अलग हो सकती है।
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