हम में से ज्यादातर लोग कभी न कभी किसी की मदद के लिए अपना मोबाइल हॉटस्पॉट ऑन कर देते हैं। ट्रेन में बैठे किसी अनजान यात्री को इंटरनेट चाहिए, दोस्त का डेटा खत्म हो गया या ऑफिस के बाहर नेटवर्क नहीं मिल रहा। यह सब आम बातें हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही छोटी सी मदद आपको cyber crime के जाल में फंसा सकती है।
हाल के महीनों में ‘Hotspot Scam’ से जुड़े कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों के मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल साइबर अपराध के लिए किया गया और जिम्मेदारी उसी व्यक्ति पर आ गई जिसने हॉटस्पॉट शेयर किया था। यह खबर डराने के लिए नहीं, बल्कि सचेत करने के लिए है।
Hotspot Scam आखिर होता क्या है
Hotspot Scam में अपराधी किसी दूसरे व्यक्ति के मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल करके गैरकानूनी गतिविधियां करते हैं। इसमें फर्जी वेबसाइट एक्सेस करना, ऑनलाइन फ्रॉड, आपत्तिजनक कंटेंट डाउनलोड करना या किसी और के अकाउंट में सेंध लगाना शामिल हो सकता है।
जब कोई व्यक्ति अपना मोबाइल हॉटस्पॉट ऑन करता है, तो उस नेटवर्क से होने वाली हर ऑनलाइन एक्टिविटी का डिजिटल रिकॉर्ड उसी मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस से जुड़ जाता है। यही वजह है कि cyber crime की जांच में सबसे पहले उसी व्यक्ति को नोटिस भेजा जाता है, जिसने नेटवर्क शेयर किया था।
कैसे फंस जाते हैं आम लोग
कई मामलों में पीड़ित को तब तक कुछ पता ही नहीं चलता, जब तक पुलिस या साइबर सेल का कॉल नहीं आ जाता। एक सामान्य उदाहरण समझिए। आपने स्टेशन पर किसी अनजान व्यक्ति को हॉटस्पॉट दे दिया। उसने उस नेटवर्क से किसी फर्जी लिंक को एक्सेस किया या ऑनलाइन ठगी की।
तकनीकी तौर पर वह एक्टिविटी आपके मोबाइल नेटवर्क से हुई। जांच एजेंसियों के लिए पहला नाम आपका होता है। बाद में आप यह साबित करें कि आपने खुद कुछ नहीं किया, लेकिन तब तक मानसिक तनाव और समय की बर्बादी शुरू हो जाती है।
साइबर अपराधी हॉटस्पॉट का इस्तेमाल क्यों करते हैं
साइबर अपराधी जानते हैं कि सीधे अपने नेटवर्क से गलत काम करना उन्हें तुरंत पकड़वा सकता है। इसलिए वे दूसरों के मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं।
इससे उन्हें दो फायदे मिलते हैं। पहला, उनकी पहचान छुपी रहती है। दूसरा, जांच की दिशा किसी और की तरफ मुड़ जाती है। यही कारण है कि cyber crime में हॉटस्पॉट स्कैम तेजी से बढ़ रहा है।
कानून की नजर में जिम्मेदारी किसकी होती है
भारतीय साइबर कानून के अनुसार, किसी भी नेटवर्क से होने वाली गतिविधि की प्राथमिक जिम्मेदारी नेटवर्क ओनर की होती है। हालांकि जांच के दौरान सच्चाई सामने आने पर निर्दोष व्यक्ति को राहत मिल जाती है, लेकिन शुरुआती पूछताछ और नोटिस से बचना मुश्किल होता है।
यही वजह है कि साइबर एक्सपर्ट्स अनजान लोगों के साथ मोबाइल नेटवर्क शेयर न करने की सलाह देते हैं।
असली यूजर्स का अनुभव क्या कहता है
कई यूजर्स ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपने अनुभव साझा किए हैं। किसी को घंटों थाने में बैठना पड़ा, तो किसी को अपना फोन जब्त कराना पड़ा। बाद में मामला साफ हुआ, लेकिन उस डर और अपमान की भरपाई आसान नहीं होती।
यह अनुभव बताते हैं कि cyber crime सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर असर डालने वाला खतरा है।
मोबाइल हॉटस्पॉट इस्तेमाल करते समय क्या सावधानी रखें
अगर हॉटस्पॉट इस्तेमाल करना जरूरी हो, तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
पहली, अनजान व्यक्ति को कभी भी हॉटस्पॉट न दें।
दूसरी, हॉटस्पॉट का पासवर्ड मजबूत रखें और खुले नेटवर्क से बचें।
तीसरी, हॉटस्पॉट ऑन करने के बाद कनेक्टेड डिवाइस की संख्या और नाम जरूर चेक करें।
चौथी, जरूरत खत्म होते ही हॉटस्पॉट तुरंत बंद कर दें।
ये छोटी सावधानियां आपको बड़े cyber crime से बचा सकती हैं।
सरकार और साइबर एजेंसियों की चेतावनी
साइबर क्राइम सेल और सरकारी एजेंसियां लगातार लोगों को जागरूक कर रही हैं। पुलिस का साफ कहना है कि डिजिटल जमाने में हर व्यक्ति अपने नेटवर्क का जिम्मेदार है।
सरकार की साइबर सुरक्षा वेबसाइट्स और हेल्पलाइंस पर भी हॉटस्पॉट स्कैम को लेकर गाइडलाइंस जारी की गई हैं। इनका मकसद लोगों को डराना नहीं, बल्कि सुरक्षित बनाना है।
भविष्य में क्यों और बढ़ सकता है यह खतरा
जैसे जैसे डिजिटल सेवाएं बढ़ रही हैं, वैसे वैसे cyber crime के तरीके भी बदल रहे हैं। फ्री वाईफाई और हॉटस्पॉट की आदत लोगों को असावधान बना रही है।
आने वाले समय में यह खतरा और बढ़ सकता है, अगर लोग जागरूक नहीं हुए। तकनीक का फायदा तभी है, जब उसका इस्तेमाल समझदारी से किया जाए।
हॉटस्पॉट शेयर करना भले ही एक छोटी सी मदद लगे, लेकिन इसके परिणाम बड़े हो सकते हैं। आज के डिजिटल दौर में cyber crime किसी दूर की चीज नहीं, बल्कि हमारे आसपास की हकीकत है।
थोड़ी सी सतर्कता, सही जानकारी और जागरूकता आपको कानूनी झंझट और मानसिक तनाव से बचा सकती है। अगली बार जब कोई आपसे इंटरनेट मांगे, तो मदद से पहले खतरे को जरूर समझें।
Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट्स, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह और जागरूकता अभियानों पर आधारित है। किसी भी कानूनी स्थिति में स्थानीय साइबर क्राइम सेल या विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
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